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                <title>Health Alert - Punjab News Times</title>
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                <description>Health Alert RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सैनिटाइजर या साबुन-पानी, हाथों की सफाई के लिए क्या है बेहतर?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हर साल लाखों मरीज और स्वास्थ्यकर्मी अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों से प्रभावित होते हैं। इनमें से कई संक्रमण ऐसे होते हैं, जिन्हें आसानी से रोका जा सकता है। अक्सर ये संक्रमण ऐसे कीटाणुओं के कारण फैलते हैं, जो एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस विकसित कर चुके होते हैं, जिससे अस्पतालों में गंभीर बीमारियों या संक्रमणों का प्रकोप फैल सकता है। विश्व हाथ स्वच्छता दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम है, जो हर साल 5 मई को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में हाथ की स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। कोरोना के बाद से ही लोगों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/what-is-better-for-cleaning-sanitizer-or-soap-water-hands/article-7620"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-05/images-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हर साल लाखों मरीज और स्वास्थ्यकर्मी अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों से प्रभावित होते हैं। इनमें से कई संक्रमण ऐसे होते हैं, जिन्हें आसानी से रोका जा सकता है। अक्सर ये संक्रमण ऐसे कीटाणुओं के कारण फैलते हैं, जो एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस विकसित कर चुके होते हैं, जिससे अस्पतालों में गंभीर बीमारियों या संक्रमणों का प्रकोप फैल सकता है। विश्व हाथ स्वच्छता दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम है, जो हर साल 5 मई को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में हाथ की स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। कोरोना के बाद से ही लोगों के बीच हाथों की सफाई का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अब लोग पहले से अधिक हाथों को साबुन की मदद से साफ करते हैं और बाहर सेनिटाइजर यूज करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या है थीम?<br />इस वर्ष, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ल्ड हैंड हाइजीन डे 2025 के लिए थीम दी है- “It might be gloves, it’s always hand hygiene”, इसका मतलब है- ग्लव्स जरूरी हो सकते हैं, लेकिन हाथों की सफाई हमेशा अनिवार्य है। इस उद्देश्य का सीधा संदेश यह है कि जहां दस्ताने पहनना जरूरी हो सकता है, वहीं हाथों की स्वच्छता बनाए रखना उससे भी ज्यादा आवश्यक हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लव्स पहनना संक्रमण से पूरी तरह नहीं बचा सकता, जब तक हम सही तरीके से हाथ धोने की आदत न अपनाएं। साफ हाथों का मतलब है सुरक्षित अस्पताल और सुरक्षित घर। यह याद रखना जरूरी है कि ग्लव्स सिर्फ एक बैरियर हैं, लेकिन हाथों की सफाई हमारी पहली और सबसे अहम डिफेंस लाइन है। ग्लव्स की बाहरी सतह पर भी संक्रमण के कण मौजूद हो सकते हैं, इसलिए हर काम से पहले और बाद में हाथ धोना जरूरी माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या कहते हैं एक्सपर्ट?<br />डॉ. रमेश चांदना, लैबोरेटरी और ब्लड बैंक सर्विस, चेयरमैन, एशियन अस्पताल, बताते हैं जैसा कि इस साल की थीम है, ‘It might be gloves, it’s always hand hygiene’। हमें समझना होगा कि हर मरीज की सुरक्षा हमारे हाथों में है। हाथों की स्वच्छता एक साधारण आदत लग सकती है, लेकिन इसका प्रभाव जीवनरक्षक होता है। हम अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ ग्लव्स पहन लेना काफी है, लेकिन इसे पहनने से पहले और बाद में हाथ धोना उतना ही जरूरी होता है। खासकर अस्पतालों में यह संक्रमण रोकने की पहली और सबसे जरूरी कड़ी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों से अपील<br />हम आम लोगों से भी अपील करते हैं कि कीटाणुओं के संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए नियमित रूप से हाथ धोएं और सैनिटाइज करें। यह न केवल कीटाणुओं को मारने में मदद करता है, बल्कि किसी भी संभावित संक्रमण को फैलने से भी रोकता है। इसलिए हाथों की स्वच्छता को हेल्दी और फिट रहने के लिए प्राइमरी माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">WHO की सलाह<br />WHO के अनुसार, हाथों की स्वच्छता न केवल स्वास्थ्यकर्मियों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी बाहरी प्रक्रिया करने से पहले और बाद में हमें साबुन और पानी की मदद से हाथ धोना या अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का उपयोग करना चाहिए। 1 मिनट से भी कम का यह काम आपको गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-05/images-(1).jpeg" alt="images (1)" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.punjabnewstimes.com/sport/kl-rahul-will-break-the-opportunity-to-create-history-big/article-7618">KL Rahul के पास इतिहास रचने का मौका , इतने रन बनाते ही टूट जाएगा बड़ा रिकॉर्ड</a></p>
<p style="text-align:justify;">हाथ धोना क्यों जरूरी है?<br />1. बीमारियों से बचाव- डायरिया, सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे संक्रमणों का खतरा कम होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">2. सबकी सुरक्षा- बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए संक्रमण का खतरा घटता है।</p>
<p style="text-align:justify;">3. स्वच्छता की आदत- हाथ धोना एक अच्छी और जिम्मेदार आदत होती है, जिसका बढ़ावा करना फायदेमंद होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">4. सामुदायिक सुरक्षा- हाथों को धोना सिर्फ खुद नहीं, बल्कि दूसरों को भी संक्रमण से बचाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 May 2025 18:27:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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                <title>गर्मियों में छींक किन बीमारियों के संकेत, इस घरेलू नुस्खे से मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">छींक आना वैसे तो एक आम समस्या है। यह हर किसी के शरीर का एक नेचुरल प्रोसेस है, जिसे रोकना मुश्किल होता है। हालांकि, छींक लोगों को रोजाना भी आती है लेकिन कुछ लोगों के साथ यह समस्या बहुत होती है। जब छींके ज्यादा आती हैं, तो हम इसे सर्दी या जुकाम से जोड़ देते हैं। एलर्जी की वजह से भी छींक आती हैं। मेडिकल भाषा में इस समस्या को एलर्जिक राइनाइटिस कहते हैं। कुछ लोगों को सुबह के समय बेवजह बहुत छींके आती है, जो इसकी वजह से ही होती है। इसके अलावा, छींके आने का कारण खुशबू, परफ्यूम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/sneezing-sneezing-in-summer-will-get-relief-from-this-home/article-7587"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-04/download-(2)1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छींक आना वैसे तो एक आम समस्या है। यह हर किसी के शरीर का एक नेचुरल प्रोसेस है, जिसे रोकना मुश्किल होता है। हालांकि, छींक लोगों को रोजाना भी आती है लेकिन कुछ लोगों के साथ यह समस्या बहुत होती है। जब छींके ज्यादा आती हैं, तो हम इसे सर्दी या जुकाम से जोड़ देते हैं। एलर्जी की वजह से भी छींक आती हैं। मेडिकल भाषा में इस समस्या को एलर्जिक राइनाइटिस कहते हैं। कुछ लोगों को सुबह के समय बेवजह बहुत छींके आती है, जो इसकी वजह से ही होती है। इसके अलावा, छींके आने का कारण खुशबू, परफ्यूम स्प्रे, तेज गंध, नमी आदि भी हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो लोग संवेदनशील शरीर के होते हैं, उन्हें मौसम बदलते ही ऐसी समस्याएं होती है। इन्हें सर्दी होते ही छींके आना शुरू हो जाती हैं। वहीं, गर्मी पड़ते ही छींके आने लगती है। ये लोग धूल-मिट्टी से भी प्रभावित हो जाते हैं और उन्हें छींके आने लगती हैं। कई बार लोगों को कारण भी नहीं पता चलता है और छींके आने लगती हैं। कई बार यह चिंताजनक हो जाता है क्योंकि छींके लोगों को दिन-रात परेशान करने लगती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-04/download-(2)1.jpeg" alt="download (2)" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">छींक आने के कुछ कारण<br />एलर्जिक राइनाइटिस में नाक के अंदर सूजन हो जाती है। इसका एक लक्षण बार-बार छींके आना भी है।<br />साइनस की समस्या में भी लोगों को सुबह के समय बार-बार छींक आती है।<br />नाक में ड्राइनेस होने पर भी बार-बार छींके आ सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.punjabnewstimes.com/health/this-dangerous-disease-spreads-to-men-with-careful-women/article-7511">हो जाए सावधान ! महिलाओं से पुरुषों में फैलती है यह खतरनाक बीमारी</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सुभाष गोयल वर्धन आयुर्वेदिक, हर्बल मेडिसिन के संस्थापक, चंडीगढ़, भारत के मशहूर आयुर्वेदिक एक्सपर्ट हैं। वह छींक को कंट्रोल करने का एक नुस्खा बताते हैं, जो सिर्फ 7 दिनों के अंदर ही आपको समस्या से राहत दिला सकता है। इसके लिए आपको मुलेठी का पाउडर और देसी घी का लेप बनाना है। इस लेप को सुबह-शाम नाक के अंदर लगाएं। इसकी 2-2 बूंदें डालें। 1 हफ्ते में आपको काफी राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 16:26:11 +0530</pubDate>
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                <title>मौसम का असर लोगों की सेहत पर:वायरल से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिन में गर्मी तो रात को सर्दी, तेज हवाओं से बढ़ी ठंडक से लोग वॉयरल बुखार की चपेट में, दमा,वायरल बुखार, खांसी, सर्दी ओर फ्लू के मामलों में इजाफा, मौसम की करवट कहीं आपको भी न कर दे बीमार, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके।</p>
<p>बदलते मौसम और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बरसात से मैदानी इलाकों में एक बार फिर से तेज हवाओँ के साथ ठंडक बढ़ गई है जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले एक सफ्ताह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं। अधिकांश मरीजों वायरल बुखार, खांसी और सर्दी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/what-should-be-kept-in-mind-to-avoid-viral/article-7312"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-03/download-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>दिन में गर्मी तो रात को सर्दी, तेज हवाओं से बढ़ी ठंडक से लोग वॉयरल बुखार की चपेट में, दमा,वायरल बुखार, खांसी, सर्दी ओर फ्लू के मामलों में इजाफा, मौसम की करवट कहीं आपको भी न कर दे बीमार, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके।</p>
<p>बदलते मौसम और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बरसात से मैदानी इलाकों में एक बार फिर से तेज हवाओँ के साथ ठंडक बढ़ गई है जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले एक सफ्ताह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं। अधिकांश मरीजों वायरल बुखार, खांसी और सर्दी और दमा जैसे लक्षण के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।</p>
<p>मार्च महीने में सर्दियां खत्म होने की कगार पर होती है। मार्च की शुरुआत हो चुकी है। बदलते मौसम में कभी गर्मी तो कभी सर्दी का असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है पिछले एक एक सप्ताह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं।अधिकांश मरीज वायरल बुखार, खांसी और सर्दी व दमा जैसे लक्षण के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। पहले वायरल बुखार जहां तीन से पांच दिनों में ठीक हो जाता था, लेकिन अब खांसी और बुखार लंबे समय तक बना रहता है। मौसम बदलने के साथ हमारे शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं, इसलिए  इस मौसम में सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है।</p>
<p>सेहत से जुड़ी इस खबर में करनाल के नागरिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. कुलबीर सैनी फिजिशियन से जानेंगे कि मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है? अगर आपको वायरल या दमा हो गया है तो क्या सावधानियां बरत सकते हैं, कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है और खानपान में क्या बदलाव किए जाने चाहिए।</p>
<p>मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?</p>
<p>मौसम बदलने पर मौसम बदलने पर वायरल इन्फेक्शन जैसे सर्दी, खांसी, बुखार व दमा और फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। आजकल लोगों को अजीब किस्म की खांसी हो रही है। लोग खांसी के लिए तमाम तरह के एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं, सिरप ले रहे हैं लेकिन खांसी 15 दिनों तक बनी रहती है। ऐसी स्थिति में आराम करने की सलाह दी जाती है। </p>
<p>इसके अलावा गर्म पानी का सेवन के साथ स्टीम लेनी चाहिए और सुबह शाम की ठंड में कपड़ों का विशेष रूप से ध्यान रखें। तेज हवाओं व पतझड़ के मौसम में दमें का रोग बढ़ जाता है। जिसके लिए एतिहात बरतना जरूरी है। खासकर बदलते मौसम के दौरान हाइड्रेटेड रहें और नियमित रूप से व्यायाम करें, इससे इन लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-03/download-(1).jpeg" alt="download (1)" width="1200" height="800"></img></p>
<p>ऐसे में संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रखें। इसके अलावा वायरल से बचने के लिए मास्क लगाना बहुत जरूरी है। मास्क न लगाने की वजह से हर किसी को सांस लेने में तकलीफ और खांसी की दिक्कत हो रही है. अगर हम मास्क लगाएं तो 70 प्रतिशत लोग वायरल से बच सकेंगे, क्योंकि सांस के जरिए ही बैक्टीरिया शरीर के अंदर प्रवेश करता है। </p>
<p>Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.punjabnewstimes.com/breaking-news/careful-now-in-mohali-traffic-rules-like-chandigarh-may-be/article-7310">सावधान ! अब मोहाली में भी चंडीगढ़ जैसे ट्रैफिक नियम , एक गलती पड़ सकती है भारी</a></p>
<p>बी कॉम्प्रेलेक्स, विटामिट सी युक्त फल खाएं और दवाएं लें और इम्यूनिटी ठीक रखें। एक्सरसाइज जरूर करें। सादा खाना खाएं। बाहर के खाने से बचना चाहिए। तला-भुना खाने से भी परहेज करें। इस मौसम में बच्चों को फास्ट फूड से एकदम दूर रखे।घर में बना हुआ खाना खाएं। बुखार आने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 16:44:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली की हवा में सांस लेना 50 सिगरेट पीने के बराबर, इन बातों का रखें ख्याल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बढ़ती हुई गंभीर एयर क्वालिटी का मतलब यह भी है कि यह एक व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन सांस में ली जाने वाली या धूम्रपान की जाने वाली सिगरेट की मात्रा के बराबर है. राष्ट्रीय राजधानी में सबसे खराब स्थिति 978 के AQI पर है. जहां एक व्यक्ति प्रतिदिन 49.02 सिगरेट सांस में ले सकता है. अक्टूबर के आखिर में दिल्ली में एयर क्वालिटी निम्न स्तर पर है और हर दिन और भी खराब होती जा रही है. इसके लिए पटाखे और पराली जलाना जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं.</p>
<p>दिल्ली में दम घुट रहा है</p>
<p>दिल्ली के निवासियों को अपने सबसे बुरे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/breathing-delhis-air-is-equivalent-to-smoking-50-cigarettes-keep/article-6351"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/download-(32).jpeg" alt=""></a><br /><p>बढ़ती हुई गंभीर एयर क्वालिटी का मतलब यह भी है कि यह एक व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन सांस में ली जाने वाली या धूम्रपान की जाने वाली सिगरेट की मात्रा के बराबर है. राष्ट्रीय राजधानी में सबसे खराब स्थिति 978 के AQI पर है. जहां एक व्यक्ति प्रतिदिन 49.02 सिगरेट सांस में ले सकता है. अक्टूबर के आखिर में दिल्ली में एयर क्वालिटी निम्न स्तर पर है और हर दिन और भी खराब होती जा रही है. इसके लिए पटाखे और पराली जलाना जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं.</p>
<p>दिल्ली में दम घुट रहा है</p>
<p>दिल्ली के निवासियों को अपने सबसे बुरे डर का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि AQI उनकी कल्पना से भी बदतर है.aqi.in के अनुसार, 18 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे तक राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 978 था. यह प्रति दिन यानी 24 घंटे में 49.02 सिगरेट पीने के बराबर है.</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि के बावजूद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के चरण 4 को लागू करने में देरी के लिए आप के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को भी फटकार लगाई. न्यायमूर्ति अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि वह जीआरएपी के चरण 4 के तहत निवारक उपायों में किसी भी तरह की कमी की अनुमति नहीं देगी. भले ही एक्यूआई 450 से नीचे चला जाए.</p>
<p>हरियाणा की एयर क्वालिटी ऐसी है</p>
<p>हरियाणा में AQI 631 दर्ज किया गया, जिसका मतलब है कि प्रतिदिन 33.25 सिगरेट पी जाती हैं. राज्य की वायु गुणवत्ता पराली जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण का काफी असर पड़ता है. 18 नवंबर को हरियाणा में तापमान न्यूनतम 16.55 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 27.56 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है.</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/download-(32).jpeg" alt="download (32)" width="747" height="420"></img></p>
<p>घर या बाहर पॉल्यूशन के दौरान इन बातों का रखें ख्याल</p>
<p>N95 और N99 मास्क अधिकांश पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) को फ़िल्टर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. जो उन्हें प्रदूषण के खिलाफ़ एक बेहतरीन अवरोधक बनाते हैं. बाहर निकलते समय मास्क पहनना सुनिश्चित करें. खासकर उन क्षेत्रों में जहां हवा की गुणवत्ता खराब है.</p>
<p>घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें: घर के अंदर की हवा भी बाहरी प्रदूषण से प्रभावित हो सकती है. अपने घर के लिए एक अच्छे एयर प्यूरीफायर में निवेश करने से घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है. HEPA फ़िल्टर वाले प्यूरीफायर देखें जो छोटे कणों को फँसा सकते हैं. यह सुनिश्चित करते हुए कि आपके घर के अंदर की हवा साफ और सांस लेने के लिए सुरक्षित है.</p>
<p>एयर पॉल्यूशन के दौरान खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें: वेंटिलेशन महत्वपूर्ण है, उच्च प्रदूषण के दौरान खिड़किया और दरवाज़े बंद रखना प्रदूषकों को आपके घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए आवश्यक है. खिड़कियों या दरवाज़ों में किसी भी गैप को सील करने पर विचार करें जहाँ से प्रदूषण अंदर आ सकता है. खासकर दिवाली के दौरान जब पटाखे जलाए जा रहे हों.</p>
<p>हाइड्रेटेड रहें: बहुत सारा पानी पीने से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और आपकी श्वसन प्रणाली ठीक से काम करती है. हाइड्रेटेड रहने से आपके गले और नाक के मार्ग नम रहते हैं. जिससे वे हानिकारक कणों को बेहतर तरीके से फ़िल्टर कर पाते हैं, जिससे आपके शरीर पर प्रदूषकों का प्रभाव भी कम हो सकता है.</p>
<p>इम्युनिटी को मजबूत रखें: इम्युनिटी को मजबूत रखने के लिए आप डाइट में अदरक, हल्दी, शहद और खट्टे फल को शामिल करें. यह सभी में फूड आइटम में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. जो आपके शरीर को प्रदूषकों के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 18:05:23 +0530</pubDate>
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                <title>बहुत ज्यादा गर्मी लगने का क्या है कारण ? इसके पीछे की क्या है असल वजह और जानिए कम करने के उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  मई और जून माह में गर्मी अपने चरम पर रहती है। देश के कई राज्यों में तापमान 50 डिग्री के ऊपर पहुंच जाता है। इस बढ़ती गर्मी में लोगों का हाल बेहाल हो जाता है। एक्सपर्ट्स की माने तो भीषण गर्मी स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह होती है। इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आंखों से जुड़ी बीमारी इत्यादि का खतरा रहता है। इसलिए गर्मियों में तेज धूप से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन हम में से कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें कुछ ज्यादा ही गर्मी लगती है। क्या आप जानते</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>शरीर</strong></h2>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/what-is-the-reason-behind-excessive-heat-what-is-the/article-4134"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-05/places-with-high-temperature-in-summers.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> मई और जून माह में गर्मी अपने चरम पर रहती है। देश के कई राज्यों में तापमान 50 डिग्री के ऊपर पहुंच जाता है। इस बढ़ती गर्मी में लोगों का हाल बेहाल हो जाता है। एक्सपर्ट्स की माने तो भीषण गर्मी स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह होती है। इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आंखों से जुड़ी बीमारी इत्यादि का खतरा रहता है। इसलिए गर्मियों में तेज धूप से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन हम में से कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें कुछ ज्यादा ही गर्मी लगती है। क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे की क्या वजह है? आखिर क्यों आपको अधिक गर्मी लगती है? अगर नहीं, तो आइए इस लेख में जानते हैं कि आखिर कुछ लोगों को अधिक गर्मी क्यों लगती है?</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>शरीर के तापमान को समझना है जरूरी</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का तापमान लगभग  98.6°F या 37°C होना चाहिए। हालांकि, शरीर का तामपान व्यक्ति की उम्र, उसके रहने का स्थान और कार्यों पर निर्भर करता है। हमारा शरीर स्वयं ही शरीर के बढ़ते और घटते तामपान को कंट्रोल करता है। वहीं, कुछ ऐसी स्थितियां होती हैं, जिसकी वजह से शरीर को अधिक गर्मी लगने लगती है। ऐसे में आपको दूसरों  की तुलना में काफी ज्यादा गर्मी लगती है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-05/places-with-high-temperature-in-summers.jpg" alt="places-with-high-temperature-in-summers"></img></p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेट करने वाली प्रणाली तापमान को कंट्रोल करने का कार्य करती है। जब हमारा ब्लड वेसेल्स फैलता है, तो इससे ब्लड फ्लो अधिक होने लगता है। ब्लड सर्कुलेट की रफ्तार जब बढ़ती है, तो इससे शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा उत्पन्न होने लगती है। ऐसे में आपको अधिक गर्मी लग सकती हैं। वहीं,  अगर ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाए, तो  ब्लड सर्कुलेशन सही नहीं होता है। ऐसे में गर्मी लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुछ बीमारियां भी होती हैं गर्मी का कारण </strong><br />कुछ अध्ययनों में इस बात का खुलासा हुआ है कि महिलाओं के शरीर का तापमान पुरुषों के शरीर के तापमान से अधिक होता है।<br />वहीं, जिन व्यक्तियों के शरीर में फैट की मात्रा अधिक होती है, उन्हे भी गर्मी अधिक लगती है।<br />इसके अलावा हाइपोथायरायडिज्म यानी अंडरएक्टिव थायरॉयड से ग्रसित मरीजों को भी काफी ज्यादा तापमान महसूस होता है।<br />अगर आपको एनीमिया, हार्टरी डिजीज जैसी परेशानी है, तो भी आपको अधिक गर्मी लग सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शरीर का तापमान ज्यादा होने का कारण?</strong><br />अगर आप काफी ज्यादा कैफीनयुक्त चीजों का सेवन करते हैं, तो इसकी वजह से आपको ज्यादा गर्मी लग सकती है।<br />एल्कोहल का अधिक सेवन करने वालों के शरीर का तापमान ज्यादा होता है।<br />काफी ज्यादा स्ट्रेस में रहने वाले लोगों के शरीर का तापमान अधिक रहता है।<br />धूप में लंबे समय तक रहने के कारण भी ज्यादा गर्मी लग सकती है।<br />सिंथेटिक, मोटे या फिर टाइट कपड़े पहनने की वजह से भी शरीर का तापमान बढ़ जाता है।<br /><strong>शरीर का तापमान बढ़ने पर क्या करें?</strong><br />बॉडी कूलिंग के लिए नैचुरल हाइड्रेटिंग चीजें जैसे- खीरा, तरबूज, वॉटरमेलन जैसी चीजें खाएं।<br />नारियल पानी, नींबू पानी इत्यादि नैचुरल ड्रिंक्स का सेवन करें।<br />मिंट से बनी चाय का सेवन करें।<br />गहरी सांस लें और हल्के-फुल्के एक्सरसाइज करें।<br />कुछ देर के लिए पैरों को ठंडे पानी में डुबोकर रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 May 2024 14:19:55 +0530</pubDate>
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