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                <title>Artificial intelligence - Punjab News Times</title>
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                <description>Artificial intelligence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पंजाब के जेलों में लगेंगे AI कैमरे, नशा, मोबाइल या संदिग्ध सामान अंदर देने पर बजेगा अलार्म&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Punjab government will install cameras
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/punjab/punjab-government-will-install-cameras/article-3031"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-01/capture-72.jpg" alt=""></a><br />
<p>Punjab government will install cameras</p>



<p>पंजाब सरकार व पुलिस प्रशासन को जेल से लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू मामले समेत बैरकों से मोबाइल व नशा बरामद होने के कारण लगातार हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से लगातार फटकार खानी पड़ रही है। पंजाब में जेलों में चलाए जाने वाले सर्च ऑपरेशन्स के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल बरामद होते है। ऐसे में एआई कैमरा से पुलिस को इन पर रोक लगाने में काफी मदद मिल ससक्ति है। कैमरे लग जाने के बाद जेल या फिर कैदी की बैरक के पास कोई भी संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत ही अधिकारियों के पास एक अलर्ट पहुंच जाएगा। कैदियों पर इस तरह की निगरानी करने वाला पंजाब देश का दूसरा राज्य होगा। इससे पहले गुजरात की वडोदरा की जेल में कैदियों पर निगरानी व सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के लिए इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जेल परिसरों में एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी प्रणाली लग रही है। </p>



<p>Read also: <a href="http://projects.nginx/punjabnewstimes/tableaus-depicting-the-punjab-warriors/">जिला एसएएस नगर की सड़कों पर पंजाब के योद्धाओं, माई भागो-महिला शक्तिकरण और पंजाबी संस्कृति के प्रदर्शन ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</a> </p>



<p>पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन की ओर से पंजाब की आठ जेलों में अब इस पर काम चल भी रहा है। इससे जेल के हर कैदी पर नजर रखने में आसानी होगी। जेलों की क्षमता से ज्यादा कैदी हैं बंद हाल ही में पंजाब पुलिस की ओर से हाईकोर्ट में एक हलफनामा दिया गया था। इसमें पंजाब जेल पुलिस प्रबंधन ने बताया था कि प्रदेश की सभी जेलों में तय संख्या से ज्यादा कैदी बंद है। ऐसे में यह साबित होता है कि पंजाब की जेलें गैंगस्टरों, कुख्यात अपराधियों और अन्य अपराधियों की बढ़ती संख्या के आगे छोटी पड़ने लगी है। पंजाब जेल पुलिस प्रशासन के मुताबिक जेलों में डीआईजी जेल के 4 में से 2, सुपरिंटेंडेंट सेंट्रल जेल/एआईजी के 11 में से 6, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के 68 में से 20, असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के 123 में से 38 और अन्य स्टाफ के 3192 में से 1382 पद रिक्त है। जाब जेल पुलिस प्रशासन ने एआई तकनीक युक्त कैमरे और बॉडी स्कैनर इंस्टाल करने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। फरवरी के मध्य तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इंस्टॉलेशन का काम शुरू हो जाएगा। पंजाब की प्रमुख जेलों में एआई कैमरे और बॉडी स्कैनर इंस्टाॅल करने में चार से 5 महीने का समय लगेगा। गुजरात के बाद पंजाब की जेल में अब कोई व्यक्ति नशा, मोबाइल या अन्य प्रतिबंधित सामान छिपाकर न ले जा सके इसके लिए अब जेलों में एक्सरे बेस्ड फुल बॉडी स्कैनर व अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। पंजाब की जेलों में नई सुरक्षा व्यवस्था अपनाएं जाने को लेकर 7 फरवरी को पंजाब पुलिस को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में प्रोग्रेस रिपोर्ट भी देनी है।</p>



<p>Punjab government will install cameras</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Punjab</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 11:09:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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                <title>आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के जरिए टेक्स्ट लिखकर बना सकेंगे वीडियो</title>
                                    <description><![CDATA[Artificial Intelligence
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br />
<p><strong>Artificial Intelligence</strong></p>



<p>अब आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से टेक्स्ट लिखकर सीधे वीडियो बना सकेंगे। इसके लिए गूगल ने अपना लेटेस्ट AI मल्टीमॉडल ल्यूमियर लॉन्च किया है। गूगल का नया AI मॉडल एक टेक्स्ट-टू-वीडियो और इमेज-टू-वीडियो मॉडल है।</p>



<p>यह रियलिस्टिक और कई तरह के मोशन क्रिएट कर वीडियो बना सकता है। यानी इससे आप टेक्स्ट से सीधे वीडियो तो बना ही सकते हैं, साथ ही इमेज से मोशन वीडियो भी क्रिएट कर सकते हैं।</p>



<p>ल्यूमियर में आपको सिर्फ टेक्स्ट या फोटो का इनपुट डालना है और AI न्यूरल नेटवर्क आपको वीडियो क्रिएट करके दे देगा। यह टूल इमेज को एनिमेट करने और इनपुट इमेज या पेंटिंग के फॉर्मेट में वीडियो बनाने की भी सुविधा देता है। ये मॉडल इमेज और वीडियो में स्पेशल एनिमेशन और पेंटिंग बनाने की भी सुविधा देता है।</p>



<p><strong>कैसे काम करता है लूमियर मॉडल</strong><br />गूगल का नया ल्यूमियर ट्रेडिशनल वीडियो मॉडल के विपरीत एक स्पेस-टाइम यू-नेट आर्किटेक्चर को अपनाता है, जो एक ही फ्रेम के हिसाब से पूरी वीडियो प्रोड्यूस करता है। इसके विपरीत, मौजूदा AI वीडियो मॉडल एक समय में दूर के मुख्य फ्रेमों को संश्लेषित करते हैं। इनोवेशन की ये टेक्नीक अस्थायी सुपर-रिजॉल्यूशन के बाद दूर के कीफ्रेम को सिंथेसाइज्ड करने की जरुरत को खत्म कर देती है। इससे वीडियो में स्टेब्लिटी आसानी से मिल जाती है।</p>



<p><strong>READ ALSO:</strong><a href="http://projects.nginx/punjabnewstimes/karnal-sanjay-heart-attack/">अमेरिका से करनाल पहुंचा युवक का शव:2 मासूम बेटों ने दी पिता को मुखाग्नि..</a></p>



<p>गूगल के रिसर्चर्स के अनुसार, टेक्स्ट-टू-वीडियो जनरेशन फ्रेमवर्क को प्री-ट्रेंड टेक्स्ट-टू-इमेज डिफ्यूजन का इस्तेमाल करके पेश किया गया है। टीम ने स्पेस-टाइम यू-नेट आर्किटेक्चर को डिप्लॉय कर के फुल फ्रेम वीडियो क्लिप जनरेट की है। इसमें स्पाटिअल और टेंपोरल मॉड्यूल को शामिल किया गया है। इससे इमेज टू वीडियो, वीडियो इनपेंटिंग और स्टाइलिश्ड जनरेशन में बढ़िया रिजल्ट मिल पाया है।</p>



<p><strong>Artificial Intelligence</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

                <link>https://www.punjabnewstimes.com/tech/artificial-intelligence/article-3010</link>
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                <pubDate>Sat, 27 Jan 2024 16:02:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2024 में AI में होंगे ये बदलाव, ऐसे बदलेगी आपकी जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[AI changes in 2024 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/tech/ai-changes-in-2024/article-2640"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-01/istock-1699437720.jpg" alt=""></a><br />
<p>AI changes in 2024 </p>



<p>2023 में AI का बोलबाला रहा। पहले Chat GPT और फिर Bard जैसे AI प्लेटफॉर्म चर्चा में रहे है। AI के आने के बाद कई प्रोफेशनल्स को लगा कि उनकी जॉब को खतरा होगा। AI ने लोगों के काम को आसान करने का काम किया है। 2023 के बाद 2024 में एआई में ऐसे बदलाव होने वाले है, जो आपकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल देंगे।</p>



<p>Read also: <a href="http://projects.nginx/punjabnewstimes/narnaul-weather-update/">Narnaul Weather: सीजन का पहला पाला गिरा; न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा</a></p>



<p>क्या है वो बदलाव-</p>



<ol>
<li>जेनरेटिव एआई- जेनरेटिव एआई (जेन-एआई) एक प्रकार का कृत्रिम बुद्धिमत्ता है जो नए डेटा को उत्पन्न करने में सक्षम है।</li>



<li>ओपन सोर्स एआई-मॉडल- ओपन सोर्स एआई एक ऐसी तकनीक है जो दुनिया भर के लोगों को एक साथ काम करके एआई मॉडल विकसित करने कअनुमति देती है। ये मॉडल हजारों दिमागों के योगदान से मिलकर बनते हैं, जिससे वे बहुत शक्तिशाली और कुशल होते है।</li>



<li>एआई रिस्क हलूसिनेशन पॉलिसी- जब जनरेटिव एआई गलत आउटपुट उत्पन्न करता है, तो इसे हलुसिनेशन कहा जाता है. हलुसिनेशन के कई संभावित कारण हो सकते है, जैसे कि गलत डेटा से प्रशिक्षित एआई मॉडल, या एआई मॉडल में गड़बड़ी। हलुसिनेशन से कई तरह की समस्याएं हो सकती है।</li>



<li>एआई आधारित पर्सनलाइज्ड एप्स- एआई आधारित पर्सनलाइज्ड एप्स एक ऐसी तकनीक है। जो एआई का उपयोग करके यूजर्स के लिए एक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करती है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के एप्स में किया जा सकता है, जैसे कि समाचार, सोशल मीडिया, और ई-कॉमर्स। गार्टनर के अनुसार, 2026 तक, हर 3 में से 1 ऐप एआई का उपयोग करेगा ताकि पर्सनलाइज्ड यूजर इंटरफेस दिया जा सके।</li>



<li>एआई की मदद से कोडिंग- 2023 में एआई कोडिंग टूल्स का इस्तेमाल कम हुआ है। इसका कारण यह है कि इन टूल्स को अभी भी विकसित किया जा रहा है। और वे अभी भी शुरुआती चरण में है। हालांकि, गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, 2028 तक, 75% इंजीनियर एआई टूल्स (जैसे की, डीप कोड, टैब नाइन) की मदद से कोड लिखेंगे।</li>
</ol>



<p>AI changes in 2024</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

                <link>https://www.punjabnewstimes.com/tech/ai-changes-in-2024/article-2640</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jan 2024 13:21:19 +0530</pubDate>
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