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                <title>Health Awareness - Punjab News Times</title>
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                <description>Health Awareness RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मौसम का असर लोगों की सेहत पर:वायरल से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिन में गर्मी तो रात को सर्दी, तेज हवाओं से बढ़ी ठंडक से लोग वॉयरल बुखार की चपेट में, दमा,वायरल बुखार, खांसी, सर्दी ओर फ्लू के मामलों में इजाफा, मौसम की करवट कहीं आपको भी न कर दे बीमार, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके।</p>
<p>बदलते मौसम और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बरसात से मैदानी इलाकों में एक बार फिर से तेज हवाओँ के साथ ठंडक बढ़ गई है जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले एक सफ्ताह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं। अधिकांश मरीजों वायरल बुखार, खांसी और सर्दी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/what-should-be-kept-in-mind-to-avoid-viral/article-7312"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-03/download-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>दिन में गर्मी तो रात को सर्दी, तेज हवाओं से बढ़ी ठंडक से लोग वॉयरल बुखार की चपेट में, दमा,वायरल बुखार, खांसी, सर्दी ओर फ्लू के मामलों में इजाफा, मौसम की करवट कहीं आपको भी न कर दे बीमार, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके।</p>
<p>बदलते मौसम और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बरसात से मैदानी इलाकों में एक बार फिर से तेज हवाओँ के साथ ठंडक बढ़ गई है जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले एक सफ्ताह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं। अधिकांश मरीजों वायरल बुखार, खांसी और सर्दी और दमा जैसे लक्षण के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।</p>
<p>मार्च महीने में सर्दियां खत्म होने की कगार पर होती है। मार्च की शुरुआत हो चुकी है। बदलते मौसम में कभी गर्मी तो कभी सर्दी का असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है पिछले एक एक सप्ताह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं।अधिकांश मरीज वायरल बुखार, खांसी और सर्दी व दमा जैसे लक्षण के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। पहले वायरल बुखार जहां तीन से पांच दिनों में ठीक हो जाता था, लेकिन अब खांसी और बुखार लंबे समय तक बना रहता है। मौसम बदलने के साथ हमारे शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं, इसलिए  इस मौसम में सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है।</p>
<p>सेहत से जुड़ी इस खबर में करनाल के नागरिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. कुलबीर सैनी फिजिशियन से जानेंगे कि मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है? अगर आपको वायरल या दमा हो गया है तो क्या सावधानियां बरत सकते हैं, कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है और खानपान में क्या बदलाव किए जाने चाहिए।</p>
<p>मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?</p>
<p>मौसम बदलने पर मौसम बदलने पर वायरल इन्फेक्शन जैसे सर्दी, खांसी, बुखार व दमा और फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। आजकल लोगों को अजीब किस्म की खांसी हो रही है। लोग खांसी के लिए तमाम तरह के एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं, सिरप ले रहे हैं लेकिन खांसी 15 दिनों तक बनी रहती है। ऐसी स्थिति में आराम करने की सलाह दी जाती है। </p>
<p>इसके अलावा गर्म पानी का सेवन के साथ स्टीम लेनी चाहिए और सुबह शाम की ठंड में कपड़ों का विशेष रूप से ध्यान रखें। तेज हवाओं व पतझड़ के मौसम में दमें का रोग बढ़ जाता है। जिसके लिए एतिहात बरतना जरूरी है। खासकर बदलते मौसम के दौरान हाइड्रेटेड रहें और नियमित रूप से व्यायाम करें, इससे इन लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-03/download-(1).jpeg" alt="download (1)" width="1200" height="800"></img></p>
<p>ऐसे में संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रखें। इसके अलावा वायरल से बचने के लिए मास्क लगाना बहुत जरूरी है। मास्क न लगाने की वजह से हर किसी को सांस लेने में तकलीफ और खांसी की दिक्कत हो रही है. अगर हम मास्क लगाएं तो 70 प्रतिशत लोग वायरल से बच सकेंगे, क्योंकि सांस के जरिए ही बैक्टीरिया शरीर के अंदर प्रवेश करता है। </p>
<p>Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.punjabnewstimes.com/breaking-news/careful-now-in-mohali-traffic-rules-like-chandigarh-may-be/article-7310">सावधान ! अब मोहाली में भी चंडीगढ़ जैसे ट्रैफिक नियम , एक गलती पड़ सकती है भारी</a></p>
<p>बी कॉम्प्रेलेक्स, विटामिट सी युक्त फल खाएं और दवाएं लें और इम्यूनिटी ठीक रखें। एक्सरसाइज जरूर करें। सादा खाना खाएं। बाहर के खाने से बचना चाहिए। तला-भुना खाने से भी परहेज करें। इस मौसम में बच्चों को फास्ट फूड से एकदम दूर रखे।घर में बना हुआ खाना खाएं। बुखार आने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 16:44:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीरियड क्रैंप्स से हालत हो जाती है खराब, तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हर महीने पीरियड्स का दर्द जी का जंजाल बन जाता है. हर किसी के लिए यह अलग होता है. किसी को पीरियड्स में कम दर्द होता है तो किसी का दर्द इतना बढ़ जाता है कि कहीं आना-जाना भी मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में अगर आप भी पीरियड्स के दौरान क्रैंप्स से परेशान रहती हैं तो यहां जानिए घर की वो कौनसी चीजें हैं जो पीरियड्स के दर्द (Period Pain) को कम करने में असरदार होती है. इसके अलावा और भी कुछ घरेलू नुस्खे आजमाए जा सकते हैं जिनसे पीरियड्स के दर्द से राहत मिल जाती है. </p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);">अदरक और</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/if-period-cramps-get-bad-then-try-these-5-home/article-7212"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-02/menstrualcramps1705302906.webp" alt=""></a><br /><p>हर महीने पीरियड्स का दर्द जी का जंजाल बन जाता है. हर किसी के लिए यह अलग होता है. किसी को पीरियड्स में कम दर्द होता है तो किसी का दर्द इतना बढ़ जाता है कि कहीं आना-जाना भी मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में अगर आप भी पीरियड्स के दौरान क्रैंप्स से परेशान रहती हैं तो यहां जानिए घर की वो कौनसी चीजें हैं जो पीरियड्स के दर्द (Period Pain) को कम करने में असरदार होती है. इसके अलावा और भी कुछ घरेलू नुस्खे आजमाए जा सकते हैं जिनसे पीरियड्स के दर्द से राहत मिल जाती है. </p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);">अदरक और शहद</span><br />पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए आप अदरक और शहद का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आप एक चम्मच शहद और एक चम्मच अदरक का रस लें। इन दोनों को अच्छी तरह से मिलाएं और फिर सेवन करें। इससे कुछ ही देर में दर्द कम हो जाएगा। साथ ही, यह गैस और क्रैम्प्स की समस्या से राहत दिलाने में भी मददगार होता है।</p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);">गर्म पानी से सिकाई करें</span><br />गर्म पानी से सिकाई करने से पेट के आसपास की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे दर्द और ऐंठन से राहत मिल सकती है। इसके लिए एक हीटिंग पै़ड या गर्म पानी की थैली लें और इसे पेट पर रखें। इससे 15-20 मिनट तक सिकाई करें। ऐसा करने से आपको जल्द राहत मिलेगी।</p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);">काली किशमिश</span><br />पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए आप काली किशमिश का सेवन कर सकते हैं। यह पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने और हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकती है। इसके लिए आप सुबह खाली पेट भीगी हुई काली किशमिश का सेवन कर सकती हैं।</p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);">गुड़</span><br />पीरियड्स के दर्द से राहत दिलाने में गुड़ काफी प्रभावी साबित हो सकता है। दरअसल, इसमें एंटी-स्पास्मोडिक गुण होते हैं, जो गर्भाशय में होने वाली ऐंठन और दर्द को कम करने में मददगार होता है। अगर आपको पीरियड्स के दौरान काफी ज्यादा दर्द होता है, जो रोजाना एक टुकड़ा गुड़ जरूर खाएं।<img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-02/menstrualcramps1705302906.webp" alt="MenstrualCramps1705302906" width="880" height="600"></img></p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);"><strong>हल्दी वाला दूध</strong></span><br />पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए आप हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकती हैं। दरअसल, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो दर्द और सूजन से राहत दिला सकते हैं। इसके लिए आप एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। इससे आपको जल्द राहत मिल सकती है।</p>
<p>Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.punjabnewstimes.com/breaking-news/top-police-officers-reshuffle-in-punjab-nageswara-rao-appointed-new/article-7210">पंजाब में शीर्ष पुलिस अधिकारियों में फेरबदल, जी नागेश्वर राव को नया सतर्कता प्रमुख किया गया नियुक्त</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 14:00:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैब ड्राइवर की दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी जीबीएस से मौत, महाराष्ट्र में तीसरी संदिग्ध मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम , एक दुर्लभ तंत्रिका विकार से पीड़ित 36 वर्षीय व्यक्ति की पुणे के पिंपरी चिंचवाड़ में यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल (वाईसीएमएच) में मृत्यु हो गई। यह महाराष्ट्र में जीबीएस से संबंधित संदिग्ध तीसरी मौत है।</p>
<p style="text-align:justify;">मरीज, जो एक कैब ड्राइवर था, को 21 जनवरी को वाईसीएमएच में भर्ती कराया गया था। पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम के अनुसार, एक विशेषज्ञ समिति ने निष्कर्ष निकाला कि उसकी मृत्यु निमोनिया के कारण श्वसन आघात के कारण हुई, जिससे तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) हो गया। 22 जनवरी को तंत्रिका चालन परीक्षण के बाद मरीज को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/cab-drivers-rare-neurological-disease-death-from-gbs-third-suspected/article-7123"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-01/download-(1)1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम , एक दुर्लभ तंत्रिका विकार से पीड़ित 36 वर्षीय व्यक्ति की पुणे के पिंपरी चिंचवाड़ में यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल (वाईसीएमएच) में मृत्यु हो गई। यह महाराष्ट्र में जीबीएस से संबंधित संदिग्ध तीसरी मौत है।</p>
<p style="text-align:justify;">मरीज, जो एक कैब ड्राइवर था, को 21 जनवरी को वाईसीएमएच में भर्ती कराया गया था। पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम के अनुसार, एक विशेषज्ञ समिति ने निष्कर्ष निकाला कि उसकी मृत्यु निमोनिया के कारण श्वसन आघात के कारण हुई, जिससे तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) हो गया। 22 जनवरी को तंत्रिका चालन परीक्षण के बाद मरीज को जीबीएस रोग से पीड़ित पाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-01/download-(1)1.jpeg" alt="download (1)" width="750" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस नवीनतम मृत्यु के साथ, महाराष्ट्र में जीबीएस से तीन संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं। बुधवार को पुणे में 56 वर्षीय महिला की इस बीमारी से मौत होने का संदेह था, जबकि सोलापुर में 40 वर्षीय व्यक्ति की 26 जनवरी को मौत हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;padding-left:40px;"><span style="background-color:rgb(251,238,184);">Read Also : <a class="post-title-lg" style="background-color:rgb(251,238,184);" href="https://www.punjabnewstimes.com/breaking-news/%22criminal-case-should-be-filed-against-haryana-cm%22-kejriwal-cm/article-7121">"हरियाणा CM के खिलाफ Criminal केस दर्ज हो, " केजरीवाल का CM सैनी पर बड़ा हमला</a></span></p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य अधिकारियों ने राज्य में जीबीएस के 130 संदिग्ध मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से अधिकांश पुणे और आसपास के क्षेत्रों में केंद्रित हैं। जांच से पता चलता है कि यह प्रकोप दूषित जल स्रोतों से जुड़ा हो सकता है, तथा कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी - दूषित भोजन और पानी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया - इसका संभावित कारण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

                <link>https://www.punjabnewstimes.com/health/cab-drivers-rare-neurological-disease-death-from-gbs-third-suspected/article-7123</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 17:10:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात होते ही होने लगती है बेचैनी, अब तक नहीं कराई जांच तो फौरन भागें, हो सकते हैं 5 कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  शाम ढलते ही कई लोगों को घबराहट होने लगती है. जैसे-जैसे अंधेरा ढलता जाता है, उनका डर भी बढ़ने लगता है. इसका असर डेली रुटीन पर पड़ सकता है. कई बार तो जिंदगी भी प्रभावित होने लगती है. रात में घबराहट होने के पीछे एंग्जाइटी-स्ट्रेस जैसी समस्याएं कारण हो सकती हैं. कई बार आनुवांशिक वजह भी इसे ट्रिगर कर सकती है. हालांकि, इसका एक कारण नींद की कमी भी हो सकती है. अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो यहां जानिए इसके कारण और बचाव के उपाय...</p>
<p style="text-align:justify;">रात में घबराहट क्यों होती है</p>
<p style="text-align:justify;">1. हार्ट डिजीज</p>
<p style="text-align:justify;">अंधेरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/as-soon-as-the-night-falls-you-start-feeling-restless/article-7031"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2025-01/images-(5).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> शाम ढलते ही कई लोगों को घबराहट होने लगती है. जैसे-जैसे अंधेरा ढलता जाता है, उनका डर भी बढ़ने लगता है. इसका असर डेली रुटीन पर पड़ सकता है. कई बार तो जिंदगी भी प्रभावित होने लगती है. रात में घबराहट होने के पीछे एंग्जाइटी-स्ट्रेस जैसी समस्याएं कारण हो सकती हैं. कई बार आनुवांशिक वजह भी इसे ट्रिगर कर सकती है. हालांकि, इसका एक कारण नींद की कमी भी हो सकती है. अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो यहां जानिए इसके कारण और बचाव के उपाय...</p>
<p style="text-align:justify;">रात में घबराहट क्यों होती है</p>
<p style="text-align:justify;">1. हार्ट डिजीज</p>
<p style="text-align:justify;">अंधेरा होने पर घबराहट (Anxiety)  महसूस होने की एक नहीं कई वजहें हो सकती हैं.  इसका एक कारण हार्ट डिजीज (Heart Disease)भी हो सकती है. दिल में किसी तरह की समस्या शरीर में ब्लड फ्लो को सही से नहीं रहने देती है, जिसका असर ब्रेन पर पड़ सकता है. इससे घबराहट बढ़ सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">2. हाइपरथायरायडिज्म </p>
<p style="text-align:justify;">रात में घबराहट का एक कारण हाइपरथायरायडिज्म भी हो सकता है. इसमें शरीर के हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं. जिसकी वजह से अंधेरा होने पर एंग्जाइटी यानी घबराहट होने लगती है. ऐसी कंडीशन में अपनी थायराइड की जांच करवानी चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2025-01/images-(5).jpeg" alt="images (5)" width="560" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">3. डायबिटीज </p>
<p style="text-align:justify;">शुगर लेवल भी रात में घबराहट का कारण बन सकता है. डायबिटीज में शुगर लेवल बढ़ने पर दिमाग पर असर बड़ता है, जो घबराहट का कारण बन सकती है. रात होने पर ये समस्या ज्यादा होती हैं और कई परेशानियां बढ़ा सकती हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">4. क्रोनिक दर्द </p>
<p style="text-align:justify;">कई बार रात में क्रोनिक दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो काफी ज्यादा घबराहट का कारण बन सकती हैं. इससे एंग्जाइटी की शिकायत होती है. ऐसी कंडीशन को इग्नोर करने की बजाय एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;">5. ब्रेन ट्यूमर</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रेन ट्यूमर भी रात में घबराहट को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. अगर बिना किसी कारण एंग्जाइटी यानी शाम होते ही घबराहट महसूस कर रहे हैं तो बिना देर किए तत्काल डॉक्टर को जाकर दिखाना चाहिए.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

                <link>https://www.punjabnewstimes.com/health/as-soon-as-the-night-falls-you-start-feeling-restless/article-7031</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2025 15:21:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> फोन से भी पड़ रहा मर्दानगी पर असर , रिपोर्ट में हुआ खतरनाक ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हाल ही में हुए रिसर्च के मुताबिक हद से ज्यादा फोन का इस्तेमाल करने से मर्दानगी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इससे पुरुषों का स्पर्म काउंट कम हो जाता है. रिसर्च ने इस बात पर मुहर लग दी है. एक्सपर्ट के मुताबिक फोन ज्यादा फोन चलाने से फर्टिलिटी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.आइए जानें इससे जुड़े फैक्ट. आजकल आप अपने आसपास के लोगों को देखते हैं कि वह अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त फोन पर बिताते हैं. आजकल हर युवा अपने फोन में बिजी है. ऑफिस का काम हो या रिल्स देखना है आजकल लोग अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/impact-of-phone-also-on-masculinity-found-dangerous-in-report/article-6497"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-12/download-(20).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में हुए रिसर्च के मुताबिक हद से ज्यादा फोन का इस्तेमाल करने से मर्दानगी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इससे पुरुषों का स्पर्म काउंट कम हो जाता है. रिसर्च ने इस बात पर मुहर लग दी है. एक्सपर्ट के मुताबिक फोन ज्यादा फोन चलाने से फर्टिलिटी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.आइए जानें इससे जुड़े फैक्ट. आजकल आप अपने आसपास के लोगों को देखते हैं कि वह अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त फोन पर बिताते हैं. आजकल हर युवा अपने फोन में बिजी है. ऑफिस का काम हो या रिल्स देखना है आजकल लोग अपने फोन में व्यस्त हैं. फोन का ज्यादा इस्तेमाल पुरुषों की फर्टिलिटी पर बुरा असर डालता है. </p>
<p style="text-align:justify;">स्विस पुरुषों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि जो पुरुष अपने फोन का अधिक बार उपयोग करते हैं, उनमें शुक्राणुओं की सांद्रता और कुल शुक्राणुओं की संख्या कम होती है. एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि जो पुरुष दिन में 20 से अधिक बार अपने फोन का उपयोग करते हैं, उनमें शुक्राणुओं की सांद्रता में 21% की कमी और कुल शुक्राणुओं की संख्या में 22% की कमी होती है.</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्राणु गतिशीलता<br />कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक मोबाइल फोन का उपयोग शुक्राणुओं की गतिशीलता में कमी से जुड़ा है.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-12/download-(20).jpeg" alt="download (20)" width="631" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">शुक्राणु डीएनए विखंडन</p>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल फोन विकिरण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से शुक्राणु डीएनए विखंडन हो सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">ऑक्सीडेटिव तनाव<br />मोबाइल फोन विकिरण ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ा सकता है, जो पुरुष प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">स्पर्म काउंट क्यों घट रहा है?</p>
<p style="text-align:justify;">1. खानपान और हवा के जरिए शरीर में एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल पहुंच रहा है, जो दूसरे हार्मोन को प्रभावित करता है.</p>
<p style="text-align:justify;">2. प्रदूषण से भी पुरुषों का स्पर्म काउंट कम हो रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">3. ज्यादा धूम्रपान और शराब पीने का असर भी स्पर्म काउंट पर पड़ सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">4. मोटापा और खराब चीजें खाने से भी स्पर्म काउंट कम हो सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">5. पुरुषों के सेक्स हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन के असंतुलन से भी स्पर्म काउंट कम होता है.</p>
<p style="text-align:justify;">6. स्पर्म से जुड़ी जेनेटिक बीमारी, प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन और यौन रोग गोनोरिया से भी स्पर्म काउंट कम होने का खतरा रहता है.</p>
<p style="text-align:justify;">7. हद से ज्यादा फोन का इस्तेमाल</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

                <link>https://www.punjabnewstimes.com/health/impact-of-phone-also-on-masculinity-found-dangerous-in-report/article-6497</link>
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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 16:58:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल से लेकर पेट तक के लिए फायदेमंद है आंवला, ठंड के मौसम में इस तरीके से खाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सर्दियां लगभग आ चुकी हैं और अगर आप देश की राजधानी में या उसके आस-पास रह रहे हैं. तो आपके अच्छे से पता होगा कि सर्दियां अपने साथ पॉल्यूशन भी लेकर आती है. हवा में ठंड के साथ एक धुंआ-धुंआ भी आता है. जिसके लिए लोग तैयार नहीं रहते हैं लेकिन इसके कारण उनकी लाइफस्टाइल पर काफी ज्यादा बुरा असर पड़ता है. इसके कारण कई सारी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">सर्दी और पॉल्यूशन आम लोगों के लाइफस्टाइल को काफी ज्यादा प्रभावित करती है. यही कारण है कि इस दौरान बाल झड़ना, समय से पहले बाल सफेद होना, त्वचा पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/amla-is-beneficial-for-hair-to-stomach-eat-it-in/article-6365"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/amla-indian-gooseberry-250-g-product-images-o590000126-p590000126-0-202409251835.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सर्दियां लगभग आ चुकी हैं और अगर आप देश की राजधानी में या उसके आस-पास रह रहे हैं. तो आपके अच्छे से पता होगा कि सर्दियां अपने साथ पॉल्यूशन भी लेकर आती है. हवा में ठंड के साथ एक धुंआ-धुंआ भी आता है. जिसके लिए लोग तैयार नहीं रहते हैं लेकिन इसके कारण उनकी लाइफस्टाइल पर काफी ज्यादा बुरा असर पड़ता है. इसके कारण कई सारी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">सर्दी और पॉल्यूशन आम लोगों के लाइफस्टाइल को काफी ज्यादा प्रभावित करती है. यही कारण है कि इस दौरान बाल झड़ना, समय से पहले बाल सफेद होना, त्वचा पर मुहांसे और पोर्स की समस्या होती है. पेट से जुड़ी समस्याएं शुरू होना. सिर्फ इतना ही नहीं यह हमारी पाचन तंत्र को भी काफी ज्यादा प्रभावित करती है. जिसके कारण हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर पड़ता है. सर्दियों में होने वाले पॉल्यूशन से निपटने के लिए कई लोग सप्लीमेंट्स और दवाइयां लेते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसा आयुर्वेदिक उपाय बताएंगे. जिसका इस्तेमाल करके आप इन परेशानियों से निजात पा सकते हैं. </p>
<p style="text-align:justify;">क्या सर्दियों में आंवला को डाइट में शामिल करना सही है?</p>
<p style="text-align:justify;">जी हां, हम बात कर रहे हैं भारतीय आंवले की. जिसे आंवला भी कहते हैं और सोशल मीडिया खास तौर पर इंस्टाग्राम. ऐसी रेसिपी और तरीकों से भरा पड़ा है. जिनसे आप इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. इनमें से लोगों का खास झुकाव अचार की ओर है. जो इसे लंबे समय तक बनाए रखता है और अतिरिक्त लाभ भी देता है.लेकिन क्या आपको इन्हें अपनी सर्दियों की डाइट में शामिल करना चाहिए? </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/amla-indian-gooseberry-250-g-product-images-o590000126-p590000126-0-202409251835.webp" alt="amla-indian-gooseberry-250-g-product-images-o590000126-p590000126-0-202409251835" width="1000" height="1000"></img></p>
<p style="text-align:justify;">आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है</p>
<p style="text-align:justify;">आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है. जिसके बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमारी त्वचा और बालों को पोषण देता है. इंडिया टूडे में छपी खबर के मुताबिक विटामिन सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है. जिससे त्वचा में कसाव आता है, झुर्रियां कम होती हैं, लोच में सुधार होता है, नमी बरकरार रहती है और त्वचा का रूखापन कम होता है.आंवले में सूजन-रोधी गुण भी होते हैं जो सूजन को कम करने, मुंहासे, लालिमा या जलन को शांत करने में मदद करते हैं. विटामिन सी काले धब्बों को कम करके त्वचा की रंगत को एक समान बनाने में भी मदद करता है.</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आप अपने अचार में नमक और तेल की मात्रा सीमित कर सकते हैं. नींबू या आंवला जैसे खट्टे खाद्य पदार्थों से बने अचार कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं. जिसमें पाचन में सहायता करना भी शामिल है, क्योंकि उनमें प्रोबायोटिक्स होते हैं. अच्छे बैक्टीरिया जो आंत के स्वास्थ्य का समर्थन करते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 16:27:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली की हवा में सांस लेना 50 सिगरेट पीने के बराबर, इन बातों का रखें ख्याल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बढ़ती हुई गंभीर एयर क्वालिटी का मतलब यह भी है कि यह एक व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन सांस में ली जाने वाली या धूम्रपान की जाने वाली सिगरेट की मात्रा के बराबर है. राष्ट्रीय राजधानी में सबसे खराब स्थिति 978 के AQI पर है. जहां एक व्यक्ति प्रतिदिन 49.02 सिगरेट सांस में ले सकता है. अक्टूबर के आखिर में दिल्ली में एयर क्वालिटी निम्न स्तर पर है और हर दिन और भी खराब होती जा रही है. इसके लिए पटाखे और पराली जलाना जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं.</p>
<p>दिल्ली में दम घुट रहा है</p>
<p>दिल्ली के निवासियों को अपने सबसे बुरे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/breathing-delhis-air-is-equivalent-to-smoking-50-cigarettes-keep/article-6351"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/download-(32).jpeg" alt=""></a><br /><p>बढ़ती हुई गंभीर एयर क्वालिटी का मतलब यह भी है कि यह एक व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन सांस में ली जाने वाली या धूम्रपान की जाने वाली सिगरेट की मात्रा के बराबर है. राष्ट्रीय राजधानी में सबसे खराब स्थिति 978 के AQI पर है. जहां एक व्यक्ति प्रतिदिन 49.02 सिगरेट सांस में ले सकता है. अक्टूबर के आखिर में दिल्ली में एयर क्वालिटी निम्न स्तर पर है और हर दिन और भी खराब होती जा रही है. इसके लिए पटाखे और पराली जलाना जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं.</p>
<p>दिल्ली में दम घुट रहा है</p>
<p>दिल्ली के निवासियों को अपने सबसे बुरे डर का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि AQI उनकी कल्पना से भी बदतर है.aqi.in के अनुसार, 18 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे तक राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 978 था. यह प्रति दिन यानी 24 घंटे में 49.02 सिगरेट पीने के बराबर है.</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि के बावजूद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के चरण 4 को लागू करने में देरी के लिए आप के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को भी फटकार लगाई. न्यायमूर्ति अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि वह जीआरएपी के चरण 4 के तहत निवारक उपायों में किसी भी तरह की कमी की अनुमति नहीं देगी. भले ही एक्यूआई 450 से नीचे चला जाए.</p>
<p>हरियाणा की एयर क्वालिटी ऐसी है</p>
<p>हरियाणा में AQI 631 दर्ज किया गया, जिसका मतलब है कि प्रतिदिन 33.25 सिगरेट पी जाती हैं. राज्य की वायु गुणवत्ता पराली जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण का काफी असर पड़ता है. 18 नवंबर को हरियाणा में तापमान न्यूनतम 16.55 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 27.56 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है.</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/download-(32).jpeg" alt="download (32)" width="747" height="420"></img></p>
<p>घर या बाहर पॉल्यूशन के दौरान इन बातों का रखें ख्याल</p>
<p>N95 और N99 मास्क अधिकांश पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) को फ़िल्टर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. जो उन्हें प्रदूषण के खिलाफ़ एक बेहतरीन अवरोधक बनाते हैं. बाहर निकलते समय मास्क पहनना सुनिश्चित करें. खासकर उन क्षेत्रों में जहां हवा की गुणवत्ता खराब है.</p>
<p>घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें: घर के अंदर की हवा भी बाहरी प्रदूषण से प्रभावित हो सकती है. अपने घर के लिए एक अच्छे एयर प्यूरीफायर में निवेश करने से घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है. HEPA फ़िल्टर वाले प्यूरीफायर देखें जो छोटे कणों को फँसा सकते हैं. यह सुनिश्चित करते हुए कि आपके घर के अंदर की हवा साफ और सांस लेने के लिए सुरक्षित है.</p>
<p>एयर पॉल्यूशन के दौरान खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें: वेंटिलेशन महत्वपूर्ण है, उच्च प्रदूषण के दौरान खिड़किया और दरवाज़े बंद रखना प्रदूषकों को आपके घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए आवश्यक है. खिड़कियों या दरवाज़ों में किसी भी गैप को सील करने पर विचार करें जहाँ से प्रदूषण अंदर आ सकता है. खासकर दिवाली के दौरान जब पटाखे जलाए जा रहे हों.</p>
<p>हाइड्रेटेड रहें: बहुत सारा पानी पीने से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और आपकी श्वसन प्रणाली ठीक से काम करती है. हाइड्रेटेड रहने से आपके गले और नाक के मार्ग नम रहते हैं. जिससे वे हानिकारक कणों को बेहतर तरीके से फ़िल्टर कर पाते हैं, जिससे आपके शरीर पर प्रदूषकों का प्रभाव भी कम हो सकता है.</p>
<p>इम्युनिटी को मजबूत रखें: इम्युनिटी को मजबूत रखने के लिए आप डाइट में अदरक, हल्दी, शहद और खट्टे फल को शामिल करें. यह सभी में फूड आइटम में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. जो आपके शरीर को प्रदूषकों के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.punjabnewstimes.com/health/breathing-delhis-air-is-equivalent-to-smoking-50-cigarettes-keep/article-6351</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 18:05:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जितनी तेज होगी इंटरनेट की स्पीड , उतनी तेज़ी से आप हो सकते है मोटापे का शिकार , स्टडी में हुआ खुलासा कर देगा हैरान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो इंटरनेट (Internet) का इस्तेमाल करते हुए घंटों समय बिताते हैं और हाई स्पीड नेटवर्क का इस्तेमाल करके नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम पर देर रात तक बैठकर बिंज वॉच करते हैं? तो सावधान हो जाइए ऑस्ट्रेलिया में हुई एक नई रिसर्च के मुताबिक फास्ट इंटरनेट कनेक्शन मोटापे (Obesity) की दर को बढ़ा रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">जी हां, ऑस्ट्रेलिया में हाउसहोल्ड, इनकम और लेबर डायनैमिक्स (HILDA) सर्वे की स्टडी में 2006 से 2019 तक हाई स्पीड इंटरनेट को ट्रैक किया गया, इसके रिजल्ट में यह बात सामने आई है कि जितना फास्ट इंटरनेट कनेक्शन हुआ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/the-faster-the-internet-speed-the-faster-you-can-become/article-6300"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/download-(22).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो इंटरनेट (Internet) का इस्तेमाल करते हुए घंटों समय बिताते हैं और हाई स्पीड नेटवर्क का इस्तेमाल करके नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम पर देर रात तक बैठकर बिंज वॉच करते हैं? तो सावधान हो जाइए ऑस्ट्रेलिया में हुई एक नई रिसर्च के मुताबिक फास्ट इंटरनेट कनेक्शन मोटापे (Obesity) की दर को बढ़ा रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">जी हां, ऑस्ट्रेलिया में हाउसहोल्ड, इनकम और लेबर डायनैमिक्स (HILDA) सर्वे की स्टडी में 2006 से 2019 तक हाई स्पीड इंटरनेट को ट्रैक किया गया, इसके रिजल्ट में यह बात सामने आई है कि जितना फास्ट इंटरनेट कनेक्शन हुआ उतना ज्यादा लोगों का वजन बढ़ा है.</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सपर्ट्स ने फास्ट इंटरनेट और मोटापे के बीच लिंक को इनएनएक्टिव बिहेवियर से समझाया. उनका कहना है कि हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन होने के कारण लोग इसमें इतना ज्यादा बिजी हो जाते हैं कि शारीरिक रूप से इनएक्टिव हो जाते हैं. फिजिकली एक्टिव ना होने के कारण ही उनका वजन बढ़ने लगता है.</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाई एंड स्पीड इंटरनेट के कारण हम शोज या ऑनलाइन चीजें देखने में घंटों समय बर्बाद कर देते हैं और फिजिकल एक्टिविटी जीरो होने लगती है. इससे मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ता है और इसका रिजल्ट होता है मोटापा. बिंज वॉच करते हैं तो बैठे रहने के साथ-साथ कुछ ना कुछ स्नैक्स भी खाते रहते हैं, जो खाने की आदत भी मोटापे को बढ़ा सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/download-(22).jpeg" alt="download (22)" width="631" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अब बात आती है कि इंटरनेट और मोटापे के इस लिंक को कैसे तोड़ा जाए? तो लोगों को इंटरनेट के कारण उनकी बड़ी हुई इनएक्टिविटी को पहचानना जरूरी है, ताकि वह स्क्रीन टाइम के बीच-बीच में ब्रेक लें और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ ही फिजिकल एक्टिविटी भी करते रहें.</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के बीच बैठकर अपने ऑफिस का काम करते हैं, टीवी मोबाइल पर समय बिताते हैं, तो उसके बीच-बीच में से ब्रेक जरूर लेते रहे. थोड़ी देर वॉक करें या कुछ एक्सरसाइज या एक्टिविटी करें, जिससे आपकी फिजिकल फिटनेस भी बेहतर हो. टीवी पर या मोबाइल पर बिंज वॉच करते समय हेल्दी स्नैक्स ऑप्शन चुनें और तला भुना खाने से बचें</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2024 15:40:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कम खाना या गैप के साथ उपवास रखना ,कौनसा डाइट प्लान बेहतर?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  अगर आप भागदौड़ भरी लाइफ में खुद को हेल्दी रखना चाहते हैं तो शरीर पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। आज के समय में एक हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए हेल्दी डाइट, खुद को एक्टिव रखना, एक्सरसाइज करना, ब्रेन को हेल्दी रखना बहुत जरूरी होता है। जब कोई अपना वजन कम करना चाहता है, तो ज्यादातर लोग किसी और चीज से ज्यादा उपवास पर अधिक ध्यान देते हैं। उनमें से ज्यादातर लोग रुक-रुक कर उपवास करना पसंद करते हैं। वजन कंट्रोल रखना और बॉडी को हेल्दी रखने के लिए मास इंडेक्स बनाए रखना बेहतर होता है। आइए जानते हैं</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरमिटेंट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/eating-less-or-fasting-with-gap-which-diet-plan-is/article-6241"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/download-(27).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> अगर आप भागदौड़ भरी लाइफ में खुद को हेल्दी रखना चाहते हैं तो शरीर पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। आज के समय में एक हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए हेल्दी डाइट, खुद को एक्टिव रखना, एक्सरसाइज करना, ब्रेन को हेल्दी रखना बहुत जरूरी होता है। जब कोई अपना वजन कम करना चाहता है, तो ज्यादातर लोग किसी और चीज से ज्यादा उपवास पर अधिक ध्यान देते हैं। उनमें से ज्यादातर लोग रुक-रुक कर उपवास करना पसंद करते हैं। वजन कंट्रोल रखना और बॉडी को हेल्दी रखने के लिए मास इंडेक्स बनाए रखना बेहतर होता है। आइए जानते हैं कि कम इंटरमिटेंट फास्टिंग या एसएफएम डाइट प्लान दोनो में से आपके लिए क्या बेहतर हो सकता है?</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?<br />इंटरमिटेंट फास्टिंग एक डाइट प्लान है, जिसमें लोग गैप लेने के बाद उपवास रखते हैं और इसके कुछ तरीके होते हैं-<br />1. 16/8 मेथड- इस तरीके में दिन में 16 घंटे उपवास किया जाता है और 8 घंटे खाने का समय होता है।<br />2. 5:2 मेथड- इस तरीके में सप्ताह में पांच दिन सामान्य रूप से खाना खाया जाता है और दो दिन कम कैलोरी वाली डाइट लेते हैं।<br />इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे<br />वजन घटाना-  इंटरमिटेंट फास्टिंग आपको वजन कम करने में मदद कर सकता है, और कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह कम कैलोरी वाली डाइट  जितना ही फायदेमंद होता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/download-(27).jpeg" alt="download (27)" width="631" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हार्ट के लिए हेल्दी- इंटरमिटेंट फास्टिंग बीपी और हार्ट से जुड़ी बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूजन करता है कम- इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से सूजन को कम करने में मदद मिलती है, जो आपको कई बीमारियों से दूर रखने में मदद कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कम मात्रा में खाना (SFM)<br />कम मात्रा में खाना जिसे  (SFM) भी कहा जाता है, इसे भी डाइट प्लान का हिस्सा माना जाता है। एक साथ अधिक भोजन करने की बजाए दिन भर में थोड़ा-थोड़ा कर के भोजन किया जाता  है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसएफएम डाइट लेने के फायदे<br />डाइजेशन- बार-बार थोड़ा-थोड़ा कर के खाने से आपके पेट के पोषक तत्व एक्टिव होते हैं। साथ ही ये आपके खाने को अवशोषित करने में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वजन कंट्रोल- थोड़ा-थोड़ा कर खाने से आप हेल्दी रह सकते हैं और आपका वजन कंट्रोल में रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लड शुगर- एसएफएम डाइट लेने से  ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है,  जो डायबिटीज वाले लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हार्ट हेल्थ- एसएफएम डाइट से रक्त लिपिड के लेवल में सुधार हो सकता है और हार्ट की बीमारी का खतरा कम हो जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Nov 2024 16:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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                <title>क्या साड़ी पहनने से हो सकता है कैंसर? ये हो सकते हैं शुरुआती लक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय परिवेश में कई महिलाएं रोजाना साड़ी पहनती हैं। इसे आमतौर पर रोजमर्रा का पहनावा माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि ‘साड़ी से कैंसर’ भी हो सकता है। इसे लेकर कुछ चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिसके बाद साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर की चर्चा होने लगी है। आइए जानते हैं क्या है साड़ी कैंसर और इसके लक्षण किस तरह दिखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर पेटीकोट के धागे को कमर पर बहुत टाइट पहनने वाली महिलाओं में हो सकता है। इससे महिलाओं को कमर के पास खुजली या जलन हो सकती है। धीरे-धीरे ये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/can-wearing-saree-cause-cancer-these-can-be-the-initial/article-6228"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/download-(20).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय परिवेश में कई महिलाएं रोजाना साड़ी पहनती हैं। इसे आमतौर पर रोजमर्रा का पहनावा माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि ‘साड़ी से कैंसर’ भी हो सकता है। इसे लेकर कुछ चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिसके बाद साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर की चर्चा होने लगी है। आइए जानते हैं क्या है साड़ी कैंसर और इसके लक्षण किस तरह दिखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर पेटीकोट के धागे को कमर पर बहुत टाइट पहनने वाली महिलाओं में हो सकता है। इससे महिलाओं को कमर के पास खुजली या जलन हो सकती है। धीरे-धीरे ये कैंसर का रूप ले सकती है।  इंटरव्यू में बोरिवली के एचसीजी कैंसर सेंटर में मेडिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. दर्शना राणे बताया कि कसकर बांधे गए पेटीकोट कॉर्ड या नाड़ा के कारण पुरानी जलन कैंसर का कारण बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. दर्शना राणे के अनुसार, जब नाड़ा लगातार पेट में एक ही जगह पर बंधा रहता है, तो इससे त्वचा रोग हो सकता है, जो बाद में चलकर अल्सर बन सकता है। इस स्थिति को मार्जोलिन अल्सर भी कहा जाता है। ऐसे दुर्लभ मामलों में ये घातक भी हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/download-(20).jpeg" alt="download (20)" width="562" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. राणे का मानना है कि भारत की भौगोलिक स्थिति भी इसमें एक बड़ा कारण है। इंडिया के हॉट और ह्यूमिड क्लाइमेट में  पेटीकोट की डोरी से होने वाली जलन और भी खराब हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी खराब है। अक्सर कसकर बांधी गई डोरी के आसपास पसीना और धूल जम जाती है। जिससे स्किन की समस्याएं होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाएं शुरुआती लक्षणों पर भी ध्यान नहीं दे पातीं। मसलन, पिगमेंटेशन या हल्के संकेतों पर ध्यान नहीं जाता। इससे स्थिति और बिगड़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि इससे बचने के लिए तंग कपड़े पहनने से बचना चाहिए और साफ-सफाई रखना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Nov 2024 18:23:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या आपका पार्टनर भी है हद से ज्यादा पोजेसिव? इन 4 तरीकों से करें उनसे डील</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">किसी भी रिश्ते में बात करना बहुत जरूरी होता है। अक्सर कई बार लड़ाई-झगड़े से बचने के लिए कपल्स एक-दूसरे के बिहेवियर को लेकर खुलकर बात नहीं करते हैं। लेकिन इससे धीरे-धीरे रिश्ते की डोर कमजोर होती चली जाती है। अगर आपका पार्टनर पजेसिव है, तो उनसे बात करके इसका कारण जानने की कोशिश करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार जलन या इनसिक्योरिटी की वजह से लोग पजेसिव होने लगते हैं। अगर ऐसा आपके पार्टनर के साथ भी है, तो उनके शक को दूर करने की कोशिश करें। इसके लिए अपने पार्टनर के प्रति थोड़ा प्यार जाहिर करें। इससे उनके मन में यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/is-your-partner-too-possessive-deal-with-him-in-these/article-6138"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-10/download-(6).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी रिश्ते में बात करना बहुत जरूरी होता है। अक्सर कई बार लड़ाई-झगड़े से बचने के लिए कपल्स एक-दूसरे के बिहेवियर को लेकर खुलकर बात नहीं करते हैं। लेकिन इससे धीरे-धीरे रिश्ते की डोर कमजोर होती चली जाती है। अगर आपका पार्टनर पजेसिव है, तो उनसे बात करके इसका कारण जानने की कोशिश करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार जलन या इनसिक्योरिटी की वजह से लोग पजेसिव होने लगते हैं। अगर ऐसा आपके पार्टनर के साथ भी है, तो उनके शक को दूर करने की कोशिश करें। इसके लिए अपने पार्टनर के प्रति थोड़ा प्यार जाहिर करें। इससे उनके मन में यह विश्वास जगेगा कि आपके दिल में भी उनके लिए प्यार है। इसके अलावा, आप उन्हें कभी-कभी अपने दोस्तों से मिलवाने भी ले जा सकते हैं। इससे उनके मन से असुरक्षा की भावना दूर होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आपका पार्टनर आपसे अपनी परेशानी या इनसिक्योरिटी के बारे में बात कर रहा है, तो गुस्से में झगड़ा करने के बजाय उसकी बात को शांति से सुनें। हर व्यक्ति के पजेसिव होने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इस प्रॉब्लम को तभी खत्म किया जा सकता है, जब आप दोनों मिलकर इसे सुलझाने का प्रयास करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-10/download-(6).jpeg" alt="download (6)" width="731" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अगर आपके रिश्ते में कुछ समस्या चल रही है, तो उसे ठीक होने का समय दें। कोई भी समस्या रातोंरात खत्म नहीं होती है। आप अपने पार्टनर की सोच को अचानक से नहीं बदल सकते हैं। इसलिए उन्हें भी खुद में बदलाव लाने का समय दें। अगर आप अपने पार्टनर के साथ रिश्ते की आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उनके साथ धैर्यता पूर्वक डील करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 16:17:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगर आपके पार्टनर को बात-बात पर आता है गुस्सा, तो इन टिप्स से रखें उनके माइंड को शांत </title>
                                    <description><![CDATA[<p>आजकल बढ़ते काम के प्रेशर के कारण किसी के पास अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय नहीं है। यह बढ़ता काम का प्रेशर न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इससे लगातार हमारी मानसिक हालत भी बिगड़ती जा रही है। यही कारण है कि आजकल लोगों को चिड़चिड़ापन रहने लगा है, जिससे व्यक्ति के आपसी रिश्ते बिगड़ने का खतरा भी काफी ज्यादा रहता है। अगर आपके पार्टनर को भी चिड़चिड़ापन रहने लगा है और बात-बात पर गुस्सा आ रहा है, तो आपको भी कुछ बातों का ध्यान रखा होगा। खासतौर पर जिन लोगों लगता है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/if-your-partner-gets-angry-at-every-conversation-then-keep/article-6113"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-10/couple-hugging-sex-love-home-cuddling-1296x728-header-1296x728.webp" alt=""></a><br /><p>आजकल बढ़ते काम के प्रेशर के कारण किसी के पास अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय नहीं है। यह बढ़ता काम का प्रेशर न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इससे लगातार हमारी मानसिक हालत भी बिगड़ती जा रही है। यही कारण है कि आजकल लोगों को चिड़चिड़ापन रहने लगा है, जिससे व्यक्ति के आपसी रिश्ते बिगड़ने का खतरा भी काफी ज्यादा रहता है। अगर आपके पार्टनर को भी चिड़चिड़ापन रहने लगा है और बात-बात पर गुस्सा आ रहा है, तो आपको भी कुछ बातों का ध्यान रखा होगा। खासतौर पर जिन लोगों लगता है कि उन्हें गुस्सा आ रहा है, तो इससे आपके रिश्ते के लिए खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, आप कुछ साधारण से टिप्स को फॉलो करके अपने पार्टनर के गुस्से को शांत रख सकते हैं और अपने नाजुक पड़ते रिश्ते को फिर से मजबूत बना सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कैसे पार्टनर को बार-बार आने वाले गुस्से को शांत किया जा सकता है।</p>
<p>ज्यादा इमोशनल न बनें<br />कुछ लोगों को बात-बात पर इमोशनल होने की आदत होती है और उनकी इस आदत से कई बार दूसरे लोग परेशान रहने लगते हैं। अगर आप भी अक्सर जरूरत से ज्यादा बार इमोशनल हो जाते हैं, तो आपके पार्टनर को गुस्सा आने के पीछे एक यह कारण भी हो सकता है। अपने इमोशन जाहिर करना जरूरी है, लेकिन बार-बार उनके बारे में बात करना गलत हो सकता है।</p>
<p>बार-बार सवाल न पूछें<br />अगर आपका पार्टनर गुस्से में है, तो उस दौरान बार-बार सवाल पूछना भी गुस्से को बढ़ा सकता है। अगर आपके मन में कोई भी सवाल है, तो उसे पूछने के लिए अपने पार्टनर के गुस्से को शांत होने का इंतजार करें। गुस्से में आपका पार्टनर आपको सही जवाब नहीं देगा और उल्टा बार-बार सवाल पूछने से उनका गुस्सा भी शांत नहीं होगा। इसलिए गुस्से को शांत होने का इंतजार करना जरूरी है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-10/couple-hugging-sex-love-home-cuddling-1296x728-header-1296x728.webp" alt="couple-hugging-sex-love-home-cuddling-1296x728-header-1296x728" width="1296" height="728"></img></p>
<p>उसकी बात को ध्यान से सुनें<br />मिस-कम्यूनिकेशन भी बार-बार गुस्सा आने का कारण हो सकता है। अगर आपके पार्टनर को लगता है कि आप उनकी बात को सुन नहीं रहे हैं, तो यह भी उनका गुस्सा बढ़ने का कारण हो सकता है। इसलिए हमेशा जब आपका पार्टनर गुस्सा तो तो उसकी बात को ध्यान से सुन लेना चाहिए। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपके गुस्से के दौरान आपका पार्टनर भी आपकी बात को सुनने की कोशिश करेगा।</p>
<p>पुराने झगड़े की बात न छेड़ें<br />रिश्तो के बीच थोड़ी बहुत कहा सुनी चलती रहती है, लेकिन बात अक्सर तब बढ़ने लगती है जब आप किसी पुरानी बात छेड़ देते हैं या किसी पुराने झगड़े को बीच में ले आते हैं। ऐसा करना गुस्से शांत करने की बजाय उल्टा बढ़ा देता है। इसलिए गुस्से के दौरान दौरान अपने पार्टनर के आगे कोई भी पुरानी बात न छेड़ें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 16:27:46 +0530</pubDate>
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