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                <title>health updates - Punjab News Times</title>
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                <title>क्या साड़ी पहनने से हो सकता है कैंसर? ये हो सकते हैं शुरुआती लक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय परिवेश में कई महिलाएं रोजाना साड़ी पहनती हैं। इसे आमतौर पर रोजमर्रा का पहनावा माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि ‘साड़ी से कैंसर’ भी हो सकता है। इसे लेकर कुछ चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिसके बाद साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर की चर्चा होने लगी है। आइए जानते हैं क्या है साड़ी कैंसर और इसके लक्षण किस तरह दिखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर पेटीकोट के धागे को कमर पर बहुत टाइट पहनने वाली महिलाओं में हो सकता है। इससे महिलाओं को कमर के पास खुजली या जलन हो सकती है। धीरे-धीरे ये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/can-wearing-saree-cause-cancer-these-can-be-the-initial/article-6228"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-11/download-(20).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय परिवेश में कई महिलाएं रोजाना साड़ी पहनती हैं। इसे आमतौर पर रोजमर्रा का पहनावा माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि ‘साड़ी से कैंसर’ भी हो सकता है। इसे लेकर कुछ चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिसके बाद साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर की चर्चा होने लगी है। आइए जानते हैं क्या है साड़ी कैंसर और इसके लक्षण किस तरह दिखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साड़ी कैंसर या पेटीकोट कैंसर पेटीकोट के धागे को कमर पर बहुत टाइट पहनने वाली महिलाओं में हो सकता है। इससे महिलाओं को कमर के पास खुजली या जलन हो सकती है। धीरे-धीरे ये कैंसर का रूप ले सकती है।  इंटरव्यू में बोरिवली के एचसीजी कैंसर सेंटर में मेडिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. दर्शना राणे बताया कि कसकर बांधे गए पेटीकोट कॉर्ड या नाड़ा के कारण पुरानी जलन कैंसर का कारण बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. दर्शना राणे के अनुसार, जब नाड़ा लगातार पेट में एक ही जगह पर बंधा रहता है, तो इससे त्वचा रोग हो सकता है, जो बाद में चलकर अल्सर बन सकता है। इस स्थिति को मार्जोलिन अल्सर भी कहा जाता है। ऐसे दुर्लभ मामलों में ये घातक भी हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-11/download-(20).jpeg" alt="download (20)" width="562" height="420"></img></p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. राणे का मानना है कि भारत की भौगोलिक स्थिति भी इसमें एक बड़ा कारण है। इंडिया के हॉट और ह्यूमिड क्लाइमेट में  पेटीकोट की डोरी से होने वाली जलन और भी खराब हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी खराब है। अक्सर कसकर बांधी गई डोरी के आसपास पसीना और धूल जम जाती है। जिससे स्किन की समस्याएं होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाएं शुरुआती लक्षणों पर भी ध्यान नहीं दे पातीं। मसलन, पिगमेंटेशन या हल्के संकेतों पर ध्यान नहीं जाता। इससे स्थिति और बिगड़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि इससे बचने के लिए तंग कपड़े पहनने से बचना चाहिए और साफ-सफाई रखना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Nov 2024 18:23:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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                <title>सफेद शक्कर या ब्राउन शुगर जानिए हेल्थ के लिए दोनों में से क्या है बेहतर ..</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शक्कर या चीनी को मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। इसीलिए, जैसे ही लोग हेल्दी इटिंग की योजना बनाते हैं वैसे ही शक्कर खाना बंद कर देते हैं। हालांकि, जिन लोगों को चीनी वाली चाय-कॉफी  पीने की आदत होती है उनके लिए अचानक से पूरी तरह से शक्कर छोड़ पाना आसान नहीं होता। ऐसे में उन लोगों को रिफाइंड शुगर  की जगह ब्राउन शुगर का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-06/brown-sugar-vs-white-sugar-1920w.webp" alt="brown-sugar-vs-white-sugar-1920w" width="900" height="600" /></p>
<p>सफेद शक्कर या ब्राउन शुगर जानिए हेल्थ के लिए दोनों में से क्या है बेहतर, साथ ही जानें दोनों के फायदे-नुकसान<br />रिफाइंड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/white-sugar-or-brown-sugar-know-which-is-better-for/article-4627"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-06/brown-sugar-vs-white-sugar-1920w.webp" alt=""></a><br /><p>शक्कर या चीनी को मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। इसीलिए, जैसे ही लोग हेल्दी इटिंग की योजना बनाते हैं वैसे ही शक्कर खाना बंद कर देते हैं। हालांकि, जिन लोगों को चीनी वाली चाय-कॉफी  पीने की आदत होती है उनके लिए अचानक से पूरी तरह से शक्कर छोड़ पाना आसान नहीं होता। ऐसे में उन लोगों को रिफाइंड शुगर  की जगह ब्राउन शुगर का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-06/brown-sugar-vs-white-sugar-1920w.webp" alt="brown-sugar-vs-white-sugar-1920w" width="900" height="600"></img></p>
<p>सफेद शक्कर या ब्राउन शुगर जानिए हेल्थ के लिए दोनों में से क्या है बेहतर, साथ ही जानें दोनों के फायदे-नुकसान<br />रिफाइंड शक्कर की तुलना में गुड़ या ब्राउन शुगर का सेवन कुछ लोगों के लिए बेहतर माना जाता है। आइए जानें सफेद शक्कर की बजाय ब्राउन शुगर का सेवन कितना सेफ या हेल्दी है?</p>
<p>क्या ब्राउन शुगर है रिफाइंड शुगर से बेहतर ? <br />हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार किसी भी तरह की शक्कर का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। हालांकि, रिफाइंड शक्कर की तुलना में गुड़  और ब्राउन शुगर का सेवन कुछ लोगों के लिए बेहतर माना जाता है। आइए जानें सफेद शक्कर की बजाय ब्राउन शुगर का सेवन कितना सेफ या हेल्दी है? </p>
<p>शरीर के लिए एक सीमित मात्रा में शक्कर का सेवन भी जरूरी माना जाता है। लेकिन, अगर आप बहुत अधिक मात्रा में शक्कर का सेवन करते हैं तो इससे आपकी हेल्थ  बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। शक्कर एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है जो फलों और अनाजों में भी पाया जाता है। इससे शरीर को शक्ति मिलती है। वहीं, जब शक्कर को रिफाइंड किया जाता है तो इसमें से पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इससे रिफाइंड शुगरया सफेद शक्कर में अनहेल्दी कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है।<br />मोटापा बढ़ा सकती है सफेद शक्कर<br />हालांकि, दोनों तरह की शक्कर में कैलोरी होती है और अगर आप कसरत नहीं करते हैं या बहुत अधिक सुस्त रहते हैं तो आपके लिए किसी भी तरह की चीनी का सेवन नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे मोटापा बढ़ सकता है। चीनी से मिलने वाली कैलोरी धीरे-धीरे शरीर में फैट के तौर पर जमा होने लगता है और इससे शरीर का वजन बढ़ने लगता है।</p>
<p>सफेद शक्कर खाने के नुकसान <br />ब्राउन शुगर या नेचुरल शुगर की तुलना में धीमी गति से पचती है। इसीलिए, जब आप ब्राउन शुगर का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर पर धीरे-धीरे प्रभाव दिखायी देता है। वहीं, जब आप सफेद शक्कर का सेवन करते हैं तो यह तुरंत डाइजेस्ट हो जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jun 2024 15:35:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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                <title>ईद के जश्न से पहले पाकिस्तान में कांगो बुखार का कहर! </title>
                                    <description><![CDATA[<p>दुनियाभर में कोरोना महामारी, काली खांसी, वेस्ट नाइल फीवर और अलग-अलग बीमारियां फैल रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान में खतरनाक कांगो वायरस  का खतरा मंडरा रहा है। जहां एक तरफ पाकिस्तान में बकरीद की तैयारियां शुरू हैं। वहीं, दूसरी ओर लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर दहशत फैलने लगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में कांगो बुखार से दो लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। इसके बाद पाकिस्तान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने इस बीमारी से बचाव के लिए नागरिकों के लिए एक अलर्ट जारी किया है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-05/download-(31).jpeg" alt="download (31)" /></p>
<p>कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कांगो बुखार के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/congo-fever-wreaks-havoc-in-pakistan-before-eid-celebration/article-4417"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-05/download-(31).jpeg" alt=""></a><br /><p>दुनियाभर में कोरोना महामारी, काली खांसी, वेस्ट नाइल फीवर और अलग-अलग बीमारियां फैल रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान में खतरनाक कांगो वायरस  का खतरा मंडरा रहा है। जहां एक तरफ पाकिस्तान में बकरीद की तैयारियां शुरू हैं। वहीं, दूसरी ओर लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर दहशत फैलने लगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में कांगो बुखार से दो लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। इसके बाद पाकिस्तान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने इस बीमारी से बचाव के लिए नागरिकों के लिए एक अलर्ट जारी किया है।</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-05/download-(31).jpeg" alt="download (31)"></img></p>
<p>कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कांगो बुखार के कारण पाकिस्तान में अब तक 2 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जिसके बाद पाकिस्तान के अटौक जिले के टेक्सिला शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। रोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने जिले में धारा-144 को लागू कर दिया है और बकरीद के कुछ दिन पहले तक पशु बाजार को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>कांगो बुखार को क्रीमियन-कांगो रक्तस्रावी बुखार (Crimean-Congo hemorrhagic fever) भी कहा जाता है। यह एक वायरस के फैलने वाला बुखार है, जो पशुओं की चमड़ी में रहने वाले हिमोरल टिक्स के काटने से फैलता है। जब यह कीड़ा इंसान को काटता है, तो इसका वायरस हमारे खून के संपर्क में आ जाता है। इसके चलते इंसान को काफी तेज बुखार का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>कांगो बुखार के लक्षण<br />शरीर में तेज दर्द।<br />जी मिचलाना।<br />पेट में दर्द रहना।<br />कमर में दर्द।<br />आंखों में जलन और दर्द।<br />शरीर का तापमान अधिक रहना।<br />बचाव के उपाय<br />जानवरों के बीच रहने वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।<br />हमेशा फुल स्लीव्स के कपड़े ही पहने जिससे आपको कोई कीड़ा काट न सके।<br />यदि किसी पशु के शरीर में इस तरह के कीड़े दिखाई देते हैं, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 15:02:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[PNT Media]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मटका या फ्रीज... गर्मी में किसका पानी सेहतमंद, फायदा जान तुरंत दौडेंगे बाजार!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इस वक्त दिल्ली सहित समूचे उत्तर भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है. राजधानी में तो तापमान 47 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. ऐसे में इस वक्त हर किसी का प्राण ठंडे पानी में अटका रहता है. शहरीकरण और भागदौड़ की जिंदगी में पानी को ठंडा करने का सबसे आसान तरीका फ्रीज है. लेकिन, आज भी एक बड़ा तबका मटके का पानी पीना पसंद करता है. ऐसे में हम आज आपके साथ मटके और फ्रीज… इनमें से किसका पानी सेहत के लिए बेहतर होता है, इसको लेकर चर्चा करते हैं.</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-05/images-(3).jpeg" alt="images (3)" /></p>
<div></div>
<p>मटका हमारी संस्कृति का हिस्सा है. जब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.punjabnewstimes.com/health/people-have-started-calling-her-aunty-if-you-get-this/article-4323"><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/400/2024-05/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><p>इस वक्त दिल्ली सहित समूचे उत्तर भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है. राजधानी में तो तापमान 47 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. ऐसे में इस वक्त हर किसी का प्राण ठंडे पानी में अटका रहता है. शहरीकरण और भागदौड़ की जिंदगी में पानी को ठंडा करने का सबसे आसान तरीका फ्रीज है. लेकिन, आज भी एक बड़ा तबका मटके का पानी पीना पसंद करता है. ऐसे में हम आज आपके साथ मटके और फ्रीज… इनमें से किसका पानी सेहत के लिए बेहतर होता है, इसको लेकर चर्चा करते हैं.</p>
<p><img src="https://www.punjabnewstimes.com/media/2024-05/images-(3).jpeg" alt="images (3)"></img></p>
<div></div>
<p>मटका हमारी संस्कृति का हिस्सा है. जब देश-दुनिया में बिजली नहीं थी और फ्रीज का आविष्कार नहीं हुआ था तब भीषण गर्मी में पानी को ठंडा करने का एक ही विकल्प था मटका. लेकिन, विकास के दौड़ में बिजली और घर-घर फ्रीज के पहुंचने की वजह से मटके की मांग कम हो गई. लोग ठंडे पानी के लिए फ्रीज पर निर्भर हो गए. लेकिन, हम सभी को पता है कि हमारी परंपरा काफी समृद्ध रही है. परंपरागत और नेचुरल चीजों की बात ही अलग है. ऐसे में निश्चिततौर पर मटके का पानी, फ्रीज की तुलना में ज्यादा सेहतमंद होता है.</p>
<p><strong>प्राकृतिक रूप से ठंडा</strong><br />किसी भी चीज में जब नेचुरल शब्द जुड़ जाता है तो फिर उससे बेहतर कुछ नहीं होता. मटका में पानी नेचुरल तरीके से ठंडा होता है. दरअसल, मटका में पानी ठंडा होने की जो प्रक्रिया है उसके पीछे साइंस के वाष्पीकरण (evaporation) का सिद्धांत काम करता है. इसके साथ ही मटके के पानी का स्वाद भी बदल जाता है. ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि मिट्टी में मौजूद मिनरल के अंश पानी में घुल जाते हैं.</p>
<p><strong>अल्कालाइन बैलेंस</strong><br />मटके की एक खासियत यह है कि इसमें पानी अपने-आप अल्कालाइन यानी क्षारीय हो जाता है. मिट्टी में मौजूद कैल्शियम, मैगनेशियम और पोटैशियम के अंश पानी में घुलने की वजह से ऐसा होता है. आयुर्वेद में अल्कालाइन वाटर को पेट के लिए बेहद कारगर बताया गया है. इसे लीवर और किडनी के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इससे कब्ज नहीं बनता और पाचन बेहतर होता है. मिट्टी के इस बर्तन से पानी में pH का बैलेंस भी बना रहता है, जिससे बॉडी में नेचुरल तरीके से डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया होती है. pH का मतलब पानी में अम्ल और क्षार का स्तर होता है.</p>
<p><strong>भरपूर पोषक तत्व</strong><br />मिट्टी के बर्तन की वजह से पानी में पोषक तत्व बना रहता है. इतना ही नहीं प्लास्टिक या मेटल के बर्तन की तरह मटके से कोई हानिकारक तत्व रिलीज नहीं होता. इस कारण मटके में पानी की प्राकृतिक शुद्धता बनी रहती है. ऐसे में जब आप मटके का पानी पीते हैं तो आप उसका 100 फीसदी प्राकृतिक लाभ लेते हैं.</p>
<p><strong>प्राकृतिक समाधान</strong><br />मटका, पानी ठंडा करने का एक प्राकृतिक तरीका है. प्लास्टिक या मेटल के बोतल की तुलना में यह पूरी तरह इको-फ्रेंडली है. इससे प्रकृति को कोई नुकसान नहीं होता है. दूसरी तरफ प्लास्टिक और मेटल के बर्तन से सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है.</p>
<p><strong>सांस्कृतिक पहचान</strong><br />मिट्टी के बर्तन हमारी परंपरा के हिस्सा हैं. इसे बनाना एक हुनर है. इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है. साथ ही हम इसके जरिए हजारों साल पुरानी अपनी परंपरा और ज्ञान को आगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं.</p>
<p><strong>सावधानी<br /></strong>मटके के तमाम फायदे जानने के बावजूद हमें कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए. हमें बाजार से अच्छी मिट्टी से बने मटके खरीदने चाहिए. हालांकि, इसकी पहचान करना एक मुश्किल काम है. कई इलाकों में मिट्टी भी प्रदूषित हो गई है, ऐसे में अगर प्रदूषित मिट्टी से मटका बनाया गया होगा तो उससे पानी भी खराब हो सकता है. साथ ही मटके की साफ-सफाई भी जरूरी है. मटके की पेंदी में हमेशा नमी रहती है. इस कारण उसमें फंगस लगने की आशंका रहती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Health</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 15:59:41 +0530</pubDate>
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